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रेरा क्या है? घर खरीदारों के अधिकार और रेरा पंजीकरण की पूरी जानकारी

Published On: October 2, 2026 9:55 PM
What Is RERA? Complete Guide to Homebuyers' Rights and RERA Registration
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भारत में अपना खुद का आशियाना खरीदना हर व्यक्ति का एक बड़ा सपना होता है। इसके लिए लोग अपनी जीवनभर की जमापूंजी लगा देते हैं। लेकिन, अतीत में कई बार ऐसा देखा गया है कि बिल्डरों द्वारा समय पर पजेशन न देना, विज्ञापनों में झूठे वादे करना और पैसों का दुरुपयोग करना आम बात थी। इसी अराजकता को समाप्त करने और घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए सरकार एक ऐतिहासिक कानून लेकर आई। यदि आप भी संपत्ति खरीदने की सोच रहे हैं, तो आपके मन में यह सवाल जरूर आएगा कि आखिर रेरा क्या है और यह आपके लिए क्यों जरूरी है?

⚡ प्रमुख मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • रेरा (RERA) अधिनियम ने भारतीय रियल एस्टेट बाजार में पारदर्शिता और जवाबदेही तय की है।
  • घर खरीदार अब देरी से मिलने वाले प्रोजेक्ट्स पर मुआवजे और कानूनी सहायता का अधिकार रखते हैं।
  • बिल्डरों को किसी भी प्रोजेक्ट के विज्ञापन और बुकिंग से पहले रेरा पंजीकरण करना अनिवार्य है।

इस लेख में हम विस्तार से चर्चा करेंगे कि रेरा अधिनियम क्या है, इसके तहत घर खरीदारों को कौन-कौन से अधिकार मिलते हैं, और रेरा पंजीकरण (RERA Registration) की प्रक्रिया क्या है।

रेरा क्या है? (What is RERA in Hindi)

रेरा क्या है, इसे आसान शब्दों में समझें तो यह ‘रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016’ [Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016] का संक्षिप्त रूप है। भारत सरकार द्वारा इस कानून को 1 मई 2016 को अधिनियमित किया गया और 1 मई 2017 से इसे पूरे देश में पूरी तरह से लागू कर दिया गया।

इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाना, खरीदारों और बिल्डरों के बीच निष्पक्षता स्थापित करना और विवादों के त्वरित समाधान के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान करना है। रेरा के आने से पहले रियल एस्टेट सेक्टर पूरी तरह से अनियंत्रित था, जिससे बिल्डरों की मनमानी चलती थी। लेकिन अब प्रत्येक राज्य में एक ‘रेरा प्राधिकरण’ (State RERA Authority) है, जो इन सभी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखती है।

रेरा पंजीकरण के मुख्य नियम और महत्व

रियल एस्टेट बाजार में नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए रेरा पंजीकरण को अनिवार्य बनाया गया है। इसके तहत निम्नलिखित नियम आते हैं:

  • अनिवार्य पंजीकरण: 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले या 8 से अधिक अपार्टमेंट वाले सभी कमर्शियल और आवासीय प्रोजेक्ट्स के लिए रेरा पंजीकरण कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
  • एस्क्रो अकाउंट (Escrow Account): बिल्डरों को खरीदारों से मिलने वाले कुल फंड का 70% हिस्सा एक अलग एस्क्रो खाते में जमा करना होता है, जिसका उपयोग केवल उसी प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए किया जा सकता है।
  • पारदर्शिता: प्रोजेक्ट से जुड़ी हर जानकारी—जैसे अप्रूव्ड नक्शे, लेआउट, कंप्लीशन शेड्यूल और कानूनी दस्तावेज—रेरा की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी होगी।

घर खरीदार अधिकार: रेरा ने आपको क्या शक्तियां दी हैं?

रेरा अधिनियम लागू होने के बाद घर खरीदारों के हाथों में बड़ी ताकत आई है। अब बिल्डर्स अपनी मनमानी नहीं कर सकते। आइए जानते हैं प्रमुख घर खरीदार अधिकार कौन-से हैं:

1. समय पर पजेशन का अधिकार

बिल्डर को एग्रीमेंट में दिए गए समय के भीतर ही घर का पजेशन देना होगा। यदि प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं होता है, तो खरीदार के पास दो विकल्प होते हैं—या तो वह अपना पूरा पैसा ब्याज सहित वापस ले ले, या फिर देरी की अवधि तक हर महीने ब्याज के रूप में मुआवजा प्राप्त करे।

2. कारपेट एरिया के आधार पर बिक्री

पहले बिल्डर सुपर बिल्ट-अप एरिया के नाम पर ग्राहकों से ज्यादा पैसे वसूलते थे, जिसमें सीढ़ियां, लिफ्ट और दीवारें भी शामिल होती थीं। रेरा के तहत अब केवल ‘कारपेट एरिया’ (वास्तविक उपयोग योग्य आंतरिक क्षेत्रफल) के आधार पर ही फ्लैट की कीमत तय होगी।

3. स्ट्रक्चरल डिफेक्ट की मुफ्त मरम्मत

यदि पजेशन मिलने के 5 साल के भीतर फ्लैट या बिल्डिंग में कोई संरचनात्मक दोष (Structural Defect) या निर्माण संबंधी कमी पाई जाती है, तो बिल्डर को उसे 30 दिनों के भीतर बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के ठीक करना होगा।

रेरा शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया

यदि कोई बिल्डर अपने वादों से मुकरता है या प्रोजेक्ट में देरी करता है, तो आप आसानी से रेरा शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके चरण निम्नलिखित हैं:

  1. संबंधित राज्य की आधिकारिक रेरा वेबसाइट पर जाएं।
  2. ‘Complaint Registration’ विकल्प पर क्लिक करके ऑनलाइन फॉर्म भरें।
  3. अपनी शिकायत का विवरण, बुकिंग रसीद, बिल्डर के साथ एग्रीमेंट और भुगतान के सबूत अपलोड करें।
  4. निर्धारित ऑनलाइन शुल्क का भुगतान करें और अपनी शिकायत जमा करें। रेरा ट्रिब्यूनल आमतौर पर 60 से 90 दिनों के भीतर मामले का निपटारा करता है।

पारंपरिक रियल एस्टेट बनाम रेरा (तुलना तालिका)

रेरा आने से पहले और बाद की स्थिति में जमीन-आसमान का अंतर आया है। इसे नीचे दी गई तालिका से समझें:

विशेषता रेरा से पहले (Pre-RERA) रेरा के बाद (Post-RERA)
फंड का उपयोग अन्य प्रोजेक्ट्स में डायवर्ट किया जा सकता था। केवल उसी प्रोजेक्ट के एस्क्रो खाते से खर्च होगा (70%)।
कारपेट एरिया सुपर बिल्ट-अप एरिया के आधार पर धोखाधड़ी। केवल कारपेट एरिया पर पारदर्शी मूल्य निर्धारण।
देरी पर मुआवजा खरीदार को बहुत कम या ना के बराबर ब्याज मिलता था। SBI MCLR दर से अधिक ब्याज के साथ पूरा मुआवजा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या रेरा के दायरे से पुराने प्रोजेक्ट्स बाहर हैं?

नहीं, जो प्रोजेक्ट्स रेरा लागू होने के समय (मई 2017) तक पूरी तरह से पूर्ण नहीं हुए थे और जिनका कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) नहीं मिला था, उन्हें भी रेरा के तहत पंजीकरण कराना अनिवार्य किया गया था।

Q2. रेरा पंजीकरण नंबर कैसे चेक करें?

आप अपने राज्य की आधिकारिक RERA वेबसाइट पर जाकर ‘Project Registration’ सेक्शन में बिल्डर का नाम या प्रोजेक्ट का नाम दर्ज करके उसका वैध रेरा नंबर और सारी डिटेल्स आसानी से जांच सकते हैं।

Q3. क्या प्लॉट या जमीन खरीदने पर भी रेरा लागू होता है?

हाँ, यदि कोई डेवलपर प्लॉटिंग प्रोजेक्ट (Land Subdivisions) बेच रहा है और उसका क्षेत्रफल 500 वर्ग मीटर से अधिक है या उसमें 8 से अधिक प्लॉट हैं, तो उसका रेरा पंजीकरण अनिवार्य है।

निष्कर्ष और कॉल-टू-एक्शन (Conclusion & CTA)

संक्षेप में कहें तो, रेरा क्या है—यह घर खरीदारों के लिए एक ढाल की तरह है जो रियल एस्टेट बाजार में पारदर्शिता, सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करता है। यदि आप भविष्य में कोई नया फ्लैट, मकान या प्लॉट खरीदने जा रहे हैं, तो हमेशा यह सुनिश्चित करें कि संबंधित प्रॉपर्टी रेरा-पंजीकृत (RERA-registered) हो। बिना रेरा नंबर के किसी भी प्रोजेक्ट में निवेश करने से बचें।

क्या आपने कभी रेरा के तहत संपत्ति खरीदी है या आपको बिल्डर से जुड़ी कोई शिकायत है? नीचे कमेंट बॉक्स में अपने अनुभव साझा करें और इस उपयोगी लेख को अपने दोस्तों और परिवार के साथ जरूर शेयर करें!

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